बिजूका
23 जनवरी, 2026

राजकुमार कुम्भज की दो कविताऍं

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सर्दियाॅं पास हैं,तो वसंत भी दूर नहीं एक अभी ठिठुर रहे हैं शब्द  अपने भीतर अपने ताप के लिए  तंबू तने हैं घने-सूने जॅंगलों में  पीने के पानी ...
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