बिजूका
05 फ़रवरी, 2026

प्रकर्ष मालवीय "विपुल" की कविताएँ

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  1.  आवाज़ आ रही है आवाज़ आ रही है? फ़ेसबुक लाइव शुरू करते हुए  विद्वतजन ने पूछा-  आवाज़ आ रही है? और अनगिनत सहमतियों में बनी  ऊपर उठे हुए ...
23 जनवरी, 2026

राजकुमार कुम्भज की दो कविताऍं

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सर्दियाॅं पास हैं,तो वसंत भी दूर नहीं एक अभी ठिठुर रहे हैं शब्द  अपने भीतर अपने ताप के लिए  तंबू तने हैं घने-सूने जॅंगलों में  पीने के पानी ...
16 नवंबर, 2025

प्रदीप मिश्र की कविताऍं

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  तप रहा है सूरज   सीने में सक्रिय हो गईं हैं असंख्य परमाणु भट्टियाँ जिनमें विरह ईंधन की जगह है   आग बबूला हो रहा है गर्मी का सूरज   महीनों ...
29 अक्टूबर, 2025

फिलिस्तीनी कविताऍं

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महमूद दरवेश (13 मार्च 1941 – 9 अगस्त 2008) फ़िलिस्तीन के राष्ट्रीय कवि थे, जिन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से निर्वासन, मातृभूमि, पहचान और ...
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