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सत्यनारायण पटेल हमारे समय के चर्चित कथाकार हैं जो गहरी नज़र से युगीन विडंबनाओं की पड़ताल करते हुए पाठक से समय में हस्तक्षेप करने की अपील करते हैं। प्रेमचंद-रेणु की परंपरा के सुयोग्य उत्तराधिकारी के रूप में वे ग्रामांचल के दुख-दर्द, सपनों और महत्वाकांक्षाओं के रग-रेशे को भलीभांति पहचानते हैं। भूमंडलीकरण की लहर पर सवार समय ने मूल्यों और प्राथमिकताओं में भरपूर परिवर्तन करते हुए व्यक्ति को जिस अनुपात में स्वार्थांध और असंवेदनशील बनाया है, उसी अनुपात में सत्यनारायण पटेल कथा-ज़मीन पर अधिक से अधिक जुझारु और संघर्षशील होते गए हैं। कहने को 'गांव भीतर गांव' उनका पहला उपन्यास है, लेकिन दलित महिला झब्बू के जरिए जिस गंभीरता और निरासक्त आवेग के साथ उन्होंने व्यक्ति और समाज के पतन और उत्थान की क्रमिक कथा कही है, वह एक साथ राजनीति और व्यवस्था के विघटनशील चरित्र को कठघरे में खींच लाते हैं। : रोहिणी अग्रवाल

कविता की नई हैंडबुक  मार्क स्ट्रैंड  अनुवाद - सिद्धेश्वर सिंह

मित्रो आज के लिए एक कविता                

कविता की नई हैंडबुक 
मार्क स्ट्रैंड 

अनुवाद - सिद्धेश्वर सिंह

अगर कोई शख्स समझने लगा है कविता को
तो समझ लो, उस पर आयद होने वाली हैं मुसीबतें।

अगर कोई शख्स रहने लगा है एक कविता के संग
तो वह मरेगा निपट अकेला।

अगर कोई शख्स रहने लगा है दो कविताओं के संग
तो वह करेगा बेवफाई किसी के साथ।

अगर कोई शख्स गर्भस्थ करता है एक कविता को
तो उसका एक बच्चा होगा कम।

अगर कोई शख्स गर्भस्थ करता है दो कविताओं को
तो उसके दो बच्चे होंगे कम।

अगर कोई शख्स लिखते समय धारण करता है मुकुट
तो उसकी होगी पहचान अगले वक्तों में।

अगर कोई शख्स लिखते समय धारण नहीं करता है मुकुट
तो वह धोखा देगा स्वयं को ही।

अगर कोई शख्स कविता पर होता है क्रुद्ध
तो उससे घॄणा करेंगे पुरुष।

अगर कोई शख्स कविता पर होता है लगातार क्रुद्ध
तो उससे घृणा करेंगी स्त्रियाँ।
 

अगर कोई शख्स खुलेआम करेगा

कविता पर दोषारोपण
तो उसके जूतों में भर जाएगी पेशाब।

अगर कोई शख्स ताकत के लिए बिसार देगा कविता को
तो उसके पास आ जाएगी बेहिसाब ताकत।

अगर कोई शख्स अपनी कविताओं को लेकर हाँकेगा डींग
तो उससे प्रेम करगी मूर्ख-मंडली।

अगर कोई शख्स अपनी कविताओं को ले कर हाँकेगा डींग

और मूर्खों को करेगा प्यार
तो वह लिख न सकेगा कुछ खास।

अगर कोई शख्स कविताओं से ध्यान

आकृष्ट करने की करेगा लालसा
तो वह होगा चाँदनी रात में चमकते उल्लू की मानिन्द।

अगर कोई शख्स लिखता है कविता और

साथी की कविताओं पर देता है दाद
उसे मिलेगी एक खूबसूरत प्रेयसी।

अगर कोई शख्स लिखता है कविता और

साथी की कविताओं पर देता है दाद लगातार
तो उसे अपनी प्रेयसी को सैर कराने की होगी खुली छूटा।

अगर कोई शख्स दूसरों की कविताओं को बताएगा अपनी
तो उसका दिल सूज कर हो जाएगा दुगने आकार का।

अगर कोई शख्स अपनी कविताओं को छोड़ देगा निर्वसन
तो उसको डर सताएगा मौत का।

अगर किसी शख्स को डर सताएगा मौत का
तो उसे बचाएँगी कविताएँ।

अगर किसी शख्स को डर नहीं सताएगा मौत का
तो उसे बचा सकती है या नहीं भी बचा सकती हैं कविताएँ।

अगर कोई शख्स पूरी करता है एक कविता
तो भावावेग से भीगे जागरण में नहाई होगी उसकी नींद
और एक कोरा सफेद कागज दे रहा होगा चुम्बन।

(अनुवाद : सिद्धेश्वर सिंह)

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