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सत्यनारायण पटेल हमारे समय के चर्चित कथाकार हैं जो गहरी नज़र से युगीन विडंबनाओं की पड़ताल करते हुए पाठक से समय में हस्तक्षेप करने की अपील करते हैं। प्रेमचंद-रेणु की परंपरा के सुयोग्य उत्तराधिकारी के रूप में वे ग्रामांचल के दुख-दर्द, सपनों और महत्वाकांक्षाओं के रग-रेशे को भलीभांति पहचानते हैं। भूमंडलीकरण की लहर पर सवार समय ने मूल्यों और प्राथमिकताओं में भरपूर परिवर्तन करते हुए व्यक्ति को जिस अनुपात में स्वार्थांध और असंवेदनशील बनाया है, उसी अनुपात में सत्यनारायण पटेल कथा-ज़मीन पर अधिक से अधिक जुझारु और संघर्षशील होते गए हैं। कहने को 'गांव भीतर गांव' उनका पहला उपन्यास है, लेकिन दलित महिला झब्बू के जरिए जिस गंभीरता और निरासक्त आवेग के साथ उन्होंने व्यक्ति और समाज के पतन और उत्थान की क्रमिक कथा कही है, वह एक साथ राजनीति और व्यवस्था के विघटनशील चरित्र को कठघरे में खींच लाते हैं। : रोहिणी अग्रवाल

न हिन्दू - न मुसलमान, ज़िन्दाबाद हिन्दुस्तान


हाथ जोड़कर एक अपील


24 तारीख़ को बाबरी मस्ज़िद विवाद का

हाईकोर्ट से फैसला आना है।


तय है कि यह एक समुदाय के पक्ष में होगा तो दूसरे के ख़िलाफ़।

ऐसे में पूरी संभावना है कि लोकतंत्र में विश्वास न रखने वाली

ताक़तें 'धर्म के ख़तरे में होने' का नारा लगा कर जनसमुदाय

को भड़काने तथा हमारा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का

प्रयास करेंगी। फ़ैसला आने से पहले ही इसके आसार नज़र

आने लगे हैं।


दो दिन बाद यानि 27 सितम्बर को भगत सिंह का जन्मदिन है।

आप जानते हैं कि पंजाब में उस वक़्त फैले दंगों के बीच

भगत सिंह ने 'सांप्रदायिक दंगे और उनका इलाज़' लेख

में सांप्रदायिक ताक़तों को ललकारते हुए कहा था कि

दंगो की आड़ में नेता अपना खेल खेलते हैं और असली

मर्ज़ यानि कि विषमता पर कोई बात नहीं होती।


इन दंगो ने हमसे पहले भी अनगिनत अपने और हमारा

आपसी प्रेम छीना है। आईये आज मिलकर ठंढे दिमाग़

से यह प्रण करें कि अगर ऐसा महौल बनाने की

कोशिश होती है तो हम इसकी मुखालफ़त करेंगे


और कुछ नहीं तो हम इसमें शामिल नहीं होंगे।


ग्वालियर में हमने इस आशय के एस एम एस

व्यापक पैमाने पर किये हैं। आप सबसे भी हमारी

अपील इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की है।


आईये भगत सिंह को याद करें और सांप्रदायिक ताक़तों को

बर्बाद करें। यह एक ख़ुशहाल देश बनाने में हमारा

सबसे बड़ा योगदान होगा।


हमने इस साल भगत सिंह के जन्मदिन को

'क़ौमी एकता दिवस' के रूप में मनाने का

भी फैसला किया है।

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