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सत्यनारायण पटेल हमारे समय के चर्चित कथाकार हैं जो गहरी नज़र से युगीन विडंबनाओं की पड़ताल करते हुए पाठक से समय में हस्तक्षेप करने की अपील करते हैं। प्रेमचंद-रेणु की परंपरा के सुयोग्य उत्तराधिकारी के रूप में वे ग्रामांचल के दुख-दर्द, सपनों और महत्वाकांक्षाओं के रग-रेशे को भलीभांति पहचानते हैं। भूमंडलीकरण की लहर पर सवार समय ने मूल्यों और प्राथमिकताओं में भरपूर परिवर्तन करते हुए व्यक्ति को जिस अनुपात में स्वार्थांध और असंवेदनशील बनाया है, उसी अनुपात में सत्यनारायण पटेल कथा-ज़मीन पर अधिक से अधिक जुझारु और संघर्षशील होते गए हैं। कहने को 'गांव भीतर गांव' उनका पहला उपन्यास है, लेकिन दलित महिला झब्बू के जरिए जिस गंभीरता और निरासक्त आवेग के साथ उन्होंने व्यक्ति और समाज के पतन और उत्थान की क्रमिक कथा कही है, वह एक साथ राजनीति और व्यवस्था के विघटनशील चरित्र को कठघरे में खींच लाते हैं। : रोहिणी अग्रवाल

24 सितंबर, 2026

राणा प्रताप सिंह की कविताऍं

 




 










एक

नदियाँ आज गंधाती

मल मूत्र प्रदूषण से बजबजाती

धरती में गड़ रही है,,,

नदियाँ आज सड़ रहीं हैं।

लोगों के चढ़ावे फूल पत्ती 

विसर्जित मूर्ति आट पर बसे

लोगों के अतिक्रमण से नदियां

आज लड़ रही हैं,,,

नदियाँ आज सड़ रही है।

अच्छे दिन की बातों में 

गंगा जमुना सिसक रही हैं 

घोर घोटाला, लुट घुस की बातें

नदियाँ आज कहां किसी से कह रही हैं।

नदियाँ आज सड़ रहीं हैं।


दो

सड़क


सड़कें बहती हैं 

नदी की तरह,

यातायात में नधी

नदी की तरह।

कदमों से नपती दूरी

कदम दर कदम 

कड़ी की तरह।

समय से नपता दूरी

घड़ी की तरह।

हम अपने परछाई से

नापते किरण की तरह।

जैसे अपने उदगम को लाँघ नहीं सकती नदियां

मन में उगते खेत पेड़

के पनपते 

फूल फल को हम रोक नहीं सकते कली की तरह।


तीन


हवायें धीरे धीरे बह कर

आसमान से मौन 

धरती से हरियाली

वातावरण से मौसम

मांग लाती है।

खेत से अनाज

बादल से पानी

सूरज से ताप  

धरती पर गर्मी 

उतार लाती है।

धीरे धीरे चल कर

हवायें हमारे लिए 

फसल बांग 

फूल फल मांग लाती है।

हम उनके लिए

धूल धुंआ प्रदूषण के 

गुब्बार हवा में छोड़ जाते हैं।

हवा पानी मिट्टी में हम

रोज अंधकार 

विषाक्त छोड़ जातें हैं।


चार


कदम कदम गांव चलें

खेत फसल  ठांव चलें।

आप से आप मिलाप

सुबह शाम नाप चलें।

नीति परनीत चले

लोगवन में गीत चले,

डांड मेंड टंटा के

झंझट टकराव चले।

पेड़वान के फुन्गी पर 

चिरई के गीत चले,

दक्षिण पूरब बानी में

कुचरन के नीति चले।

कहां के बाती अब

कहां विचार चले,

लाठी डंडा बरियार

ओही के जीत चले 

०००

राणा प्रताप सिंह 

ग्राम मटिहानियां खुर्द पोस्ट पकड़ी बुजुर्ग पडरौना

जिला कुशीनगर उप

पिन कोड 274304

मोबाइल 8756894896

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